सार्क की स्थापना कैसे और कब हुई?

South Asian Association for Regional Cooperation (SAARC)

सार्क मतलब दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन, जोकि दक्षिण एशिया के सात देशों के क्षेत्रीय सहयोग से मिला एक संगठन हैं. सार्क को अंगेजी में साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन बोला जाता हैं. सार्क की स्थापना की दिशा में प्रयास सात देशो की 1981 में कोलम्बो में विदेश सचिव स्तर के बैठक के दौरान हुआ. दिसंबर 1985 में ढाका में प्रथम शिखर सम्मलेन आयोजित किया गया जिसमें भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान और श्रीलंका इसके संस्थापक सदस्य बने. अब मालदीव और अफगानिस्तान को मिलाकर 8 सदस्य देश हो चुके है. अब तक इसके 18 शिखर सम्मलेन हो चुके है. 19वां शिखर सम्मलेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में नवम्बर 2016 में होना था, लेकिन पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के कारण भारत के दबाव के कारण अन्य सदस्य देशो द्वारा भी इस सम्मलेन को रद्द कर दिया गया. सार्क के 14वें शिखर सम्मलेन 2007 में अफगानिस्तान को आठवें सदस्य के रूप में शामिल किया गया. सार्क का मुख्यालय काठमांडू (नेपाल) में हैं.

वर्तमान तकनिकी व् वैश्वीकरण के युग में आत्मकेंद्रित या आत्मनिर्भर विकास की अवधारणा संभव नहीं हैं. इसलिए आज कोई भी इकाई राष्ट्र आर्थिक विकास की व्यवहारिक इकाई नहीं बन सकता, इसके साथ ही विकशित देशो में बढ़ते संरक्षणवाद तथा विकासशील देशो के सामने खुले बाजार में उपस्थित समस्याओं तथा आंतरिक व् बाहरी खतरों की आशंका ने क्षेत्रीयतावाद एवं क्षेत्रीय सहयोग की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं. इसी सन्दर्भ में दक्षिण एशिया में एक क्षेत्रीय मंच का विचार बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति स्वर्गीय जिआउर्र्हमान ने 1980 में व्यक्त किया था. इसकी स्थापना दक्षिण एशिया में विकासशील देशो के बिच क्षेत्रीय सहयोग बढाने, 1977 के पश्चात दक्षिण एशिया में एकसमान विचारधारा वाले पश्चिमोन्मुखी शासकों का उदय, जो विभिन्न क्षेत्रो में क्षेत्रीय संपर्क बढाने की सम्भावना तलाशने, अफगानिस्तान में विद्रोह और रुसी हस्तक्षेप, ईरान में शाह का पतन और ईरान-ईराक युद्ध ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए चुनौती पेश करना आधी प्रमुख पहलु थे.

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सार्क की स्थापना एक सोची-समझी प्रक्रिया के तहत हुई और जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग की अचंवाद्धता मूर्तरूप , मैत्री , विशवास और आपसी सुझबुझ के साथ साझा समस्याओं को हल करने की दिशा में मिलकर कार्य करना था, किन्तु व्यापक परिप्रेक्ष्य में आर्थिक विकास की व्यूह-रचना के अलावा इसे एक तरफ का प्रतिरक्षात्मक व् राजनितिक आन्दोलन भी कहा जाता है, जो लोकतंत्र एवं मानवाधिकारों की रक्षा के रूप में राजनितिक व्यवस्थाओं को नया मोड़ देने में सक्षम साबित हो सकता हैं. सार्क का झुकाव आर्थिक सहयोग , पर्यावरण, गरीबी उन्मूलन आधी प्रमुख क्षेत्रो में ठोस विकासोन्मुख विचार-विमर्श की और है.

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